यदि कोई पृथु महाराज के गुणों को सुनता है तो वह ब्राह्मण हो तो ब्रह्मशक्ति में निपुण हो जाता है, क्षत्रिय हो तो संसार का सम्राट हो जाता है, वैश्य हो तो अन्य वैश्यों तथा अनेकों पशुओं का स्वामी हो जाता है और शूद्र हो तो वह श्रेष्ठ भक्त बन जाता है।
If one hears the virtues of Prithu Maharaja and if he is a Brahmin, he becomes adept in Brahmashakti; if he is a Kshatriya, he becomes the king of the world; if he is a Vaishya, he becomes the owner of other Vaishyas and many animals and if he is a Sudra, he becomes a high-class devotee.
तात्पर्य
श्रीमद् भागवतम् में बताया गया है कि मनुष्य को अपनी स्थिति पर ध्यान दिए बिना भक्त बनना चाहिए। चाहे वह निष्काम (अकाम) हो या सांसारिक इच्छाओं (सकाम) से युक्त हो, या उसे मोक्ष (मोक्ष-काम) की इच्छा हो, उसे भगवान की उपासना करने और उनकी भक्ति करने की सलाह दी जाती है। ऐसा करने से मनुष्य जीवन के किसी भी क्षेत्र में संपूर्णता प्राप्त कर लेता है। भक्ति की प्रक्रिया - विशेष रूप से सुनना और जपना - इतनी शक्तिशाली होती है कि यह मनुष्य को संपूर्णता की अवस्था तक ले जा सकती है। इस श्लोक में ब्राह्मणों, क्षत्रियों, वैश्यों और शूद्रों का उल्लेख है, लेकिन यहाँ यह समझना चाहिए कि यह संदर्भ उस ब्राह्मण का है जो ब्राह्मण परिवार में जन्मा है, वह क्षत्रिय जो क्षत्रिय परिवार में जन्मा है, वह वैश्य जो वैश्य परिवार में जन्मा है, और वह शूद्र जो शूद्र परिवार में जन्मा है। लेकिन चाहे वह ब्राह्मण हो, क्षत्रिय हो, वैश्य हो या शूद्र, वह केवल श्रवण और जप के द्वारा पूर्णता प्राप्त कर सकता है। ब्राह्मण परिवार में जन्म लेना ही अंतिम लक्ष्य नहीं है; ब्राह्मण के पास एक ब्राह्मण की शक्ति होनी चाहिए, जिसे ब्रह्म-तेज कहा जाता है। इसी तरह, राजघराने में जन्म लेना ही सब कुछ नहीं है; व्यक्ति के पास दुनिया पर राज करने की शक्ति होनी चाहिए। इसी तरह, वैश्य के रूप में जन्म लेना ही सब कुछ नहीं है; उसके पास सैकड़ों या हजारों जानवर (विशेष रूप से गायें) होने चाहिए और अन्य वैश्यों पर शासन करना चाहिए जैसा कि वृंदावन में नंद महाराज ने किया था। नंद महाराज एक वैश्य थे जिनके पास नौ लाख गायें थीं और वो बहुत से ग्वालों और चरवाहों पर शासन करते थे। एक व्यक्ति जो शूद्र परिवार में जन्मा है वह केवल भक्ति स्वीकार करके और भगवान और उनके भक्तों के लीलाओं को श्रवण करके एक ब्राह्मण से भी महान बन सकता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥