श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 23: महाराज पृथु का भगवद्धाम गमन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  4.23.19 
अर्चिर्नाम महाराज्ञी तत्पत्‍न्यनुगता वनम् ।
सुकुमार्यतदर्हा च यत्पद्‌भ्यां स्पर्शनं भुव: ॥ १९ ॥
 
 
अनुवाद
पृथु महाराज की पत्नी रानी अर्चि, अपने पति के साथ वन में चली गईं। रानी होने के कारण उनका शरीर बहुत कोमल और नाजुक था। यद्यपि वे वन में रहने के योग्य नहीं थीं, फिर भी उन्होंने अपनी इच्छा से अपने कमल जैसे पैरों से पृथ्वी को स्पर्श किया।
 
Maharani Archi, wife of Pṛthu Mahārāja, went to the forest with her husband. Being a queen, her body was extremely delicate. Although she was not fit to live in the forest, she willingly touched the earth with her lotus feet.
तात्पर्य
क्योंकि प्रथु महाराज की पत्नी रानी और एक राजा की बेटी भी थी, इसलिए उसे कभी जमीन पर चलने का अनुभव नहीं हुआ था, क्योंकि रानियाँ कभी भी महल से बाहर नहीं निकलती थीं। वे निश्चित रूप से कभी जंगलों में नहीं जातीं थीं और जंगल में रहने की सभी कठिनाइयों को सहन नहीं करतीं थीं। वैदिक सभ्यता में रानियों द्वारा इस तरह के त्याग और पति के प्रति समर्पण के सैकड़ों समान उदाहरण हैं। भाग्य की देवी माँ सीता अपने पति, रामाचंद्र का अनुसरण करती थीं, जब वह जंगल में जाते थे। भगवान रामाचंद्र अपने पिता महाराजा दशरथ के आदेश का पालन करने के लिए जंगल गए थे, लेकिन माता सीता को ऐसा आदेश नहीं दिया गया था। फिर भी, उन्होंने स्वेच्छा से अपने पति के मार्ग को स्वीकार कर लिया। इसी तरह, राजा धृतराष्ट्र की पत्नी गांधारी भी अपने पति का जंगल में अनुसरण करती थीं। प्रथु, भगवान रामाचंद्र और धृतराष्ट्र जैसी महान हस्तियों की पत्नियाँ होने के कारण, वे आदर्श पतिव्रता महिलाएँ थीं। ऐसी रानियाँ भी आम लोगों को यह दिखाकर निर्देश देती थीं कि कैसे एक पतिव्रता पत्नी बनी जाए और जीवन के हर पड़ाव पर पति का अनुसरण किया जाए। जब पति राजा होता है, तो वह उसके साथ रानी के रूप में बैठती है, और जब वह जंगल जाता है, तो वह भी उसका अनुसरण करती है, बावजूद इसके कि जंगल में रहने में सभी प्रकार की कठिनाइयों को सहना पड़ता है। इसलिए यहाँ (अतद-अर्हा) कहा गया है कि हालाँकि वह अपने पैरों को जमीन पर नहीं रखना चाहती थी, फिर भी जब वह अपने पति के साथ जंगल गई तो उसे सभी कठिनाइयों को स्वीकार करना पड़ा।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)