कृष्ण त्वदीय-पदपंकज-पंजरान्तम
अद्यैव मे विशतु मानस-राज-हंसः
प्राण पयाण-समये कफ-वात-पित्तैः
कण्ठावरोधना-विधौ स्मरणं कुतः ते
राजा कुलशेखर स्वस्थ अवस्था में अपना शरीर छोड़ना चाहते थे, और इस तरह उन्होंने कृष्ण से प्रार्थना की कि वह उन्हें तुरंत मरने दें जब वह अच्छे स्वास्थ्य में थे और जब उनका मन स्वस्थ था। जब कोई मनुष्य मरता है, तो वह आमतौर पर म्यूकस और पित्त से अभिभूत हो जाता है, और इस तरह वह घुट जाता है। चूँकि घुटन के दौरान किसी भी ध्वनि को कंपन करना बहुत मुश्किल है, तो यह सिर्फ कृष्ण की कृपा से है कि कोई मृत्यु के समय हरे कृष्ण का जाप कर सकता है। हालाँकि, मुक्तासन स्थिति में खुद को स्थापित करने से, एक योगी तुरंत अपने शरीर को छोड़ सकता है और वह जिस ग्रह पर चाहे जा सकता है। एक संपूर्ण योगी योग के अभ्यास के माध्यम से जब चाहे अपने शरीर को छोड़ सकता है।
