Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 4.21.16: महाराज पृथु का सीना चौड़ा था, और कमर बहुत बड़ी और मोटी थी। उनका पेट, त्वचा की सिलवटों से बना हुआ, वट वृक्ष की पत्ती की तरह दिखता था। उनकी नाभि एक कुंडली की तरह थी, जांघें सुनहरे रंग की थीं, और पैरों के पंजे उभरे हुए थे। | bhagavat अध्याय 4.21: महाराज पृथु द्वारा उपदेश । bhagavat स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
व्यूढवक्षा बृहच्छ्रोणिर्वलिवल्गुदलोदर: ।
आवर्तनाभिरोजस्वी काञ्चनोरुरुदग्रपात् ॥ १६ ॥
अनुवाद
महाराज पृथु का सीना चौड़ा था, और कमर बहुत बड़ी और मोटी थी। उनका पेट, त्वचा की सिलवटों से बना हुआ, वट वृक्ष की पत्ती की तरह दिखता था। उनकी नाभि एक कुंडली की तरह थी, जांघें सुनहरे रंग की थीं, और पैरों के पंजे उभरे हुए थे।
Maharaja Prithu had a broad chest, his waist was very thick and his abdomen looked like the leaves of a banyan tree due to its bulge. His navel was deep and whirled, his thighs were golden in colour and his toes were prominent.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥