को न्वस्य कीर्तिं न शृणोत्यभिज्ञो
यद्विक्रमोच्छिष्टमशेषभूपा: ।
लोका: सपाला उपजीवन्ति काम-
मद्यापि तन्मे वद कर्म शुद्धम् ॥ १० ॥
अनुवाद
पृथु महाराज के कार्य इतने महान थे और उनके शासन की प्रणाली इतनी उदार थी कि आज भी सभी राजा और विभिन्न लोकों के देवता उनके पदचिह्नों पर चलते हैं। ऐसा कौन होगा जो उनके कीर्तिमान कार्यों को सुनना नहीं चाहेगा? उनके कार्य इतने पवित्र और शुभ हैं कि मैं उनके बारे में बार-बार सुनना चाहता हूँ।
Prithu Maharaja's deeds were so great and his system of governance so benevolent that even today all kings and deities of various worlds follow in his footsteps. Who would not like to hear about his glorious deeds? His deeds are so pure and auspicious that I want to hear about them again and again.
तात्पर्य
संत विदुर का पृथु महाराज की कथा को बार-बार सुनने का उद्देश्य सामान्य राजाओं और शासकीय अगुआओं के लिए एक आदर्श स्थापित करना था जो कि पृथु महाराज के कार्यों और कृत्यों की बार-बार कथाएँ सुनने की इच्छा रखते थे ताकि वे भी अपने राज्य और राष्ट्र पर शासन जन साधारण की समृद्धि और शांति बनाए रखने हेतु पूर्ण निष्ठा से कर सकें। दुर्भाग्यवश, वर्तमान समय में कोई भी पृथु महाराज की कथाएँ सुनने या उनके आदर्शों का अनुसरण करने की इच्छा नहीं रखता; इसलिए, दुनिया का कोई भी राष्ट्र सुखी या आध्यात्मिक समझ में प्रगतिशील नहीं है, हालाँकि यह मानव जीवन का एकमात्र उद्देश्य है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)