जो व्यक्ति देह के मोह में बिल्कुल लिप्त नहीं है, क्या ऐसा ज्ञानी और बुद्धिमान व्यक्ति घर, संतान, धन-दौलत और ऐसी ही अन्य शारीरिक बातों में देह के मोह में लिप्त होकर कष्ट पा सकता है?
How can a highly intelligent man who is not attached in the least to the bodily consciousness be influenced by the bodily consciousness regarding house, children, property and other such bodily things?
तात्पर्य
वैदिक अनुष्ठानिक समारोह निश्चित रूप से भगवान विष्णु, भगवान व्यक्तित्व के परम के प्रसन्न करने के लिए हैं। हालाँकि, ऐसी गतिविधियों से कोई व्यक्ति वास्तव में भगवान को संतुष्ट नहीं करता है। बल्कि, भगवान की स्वीकृति से, व्यक्ति अपनी इंद्रियों को संतुष्ट करने का प्रयास करता है। दूसरे शब्दों में, भौतिकवादी, जो विशेष रूप से इंद्रिय संतुष्टि में रुचि रखते हैं, को वैदिक अनुष्ठानिक समारोहों को निष्पादित करके इंद्रिय संतुष्टि का आनंद लेने की अनुमति या लाइसेंस दिया जाता है। इसे त्रिगुण्य-विषय वेद कहा जाता है। वैदिक प्रदर्शन भौतिक प्रकृति के तीनों मोड पर आधारित हैं। जो लोग भौतिक स्थिति से ऊपर उठ चुके हैं, वे ऐसे वैदिक प्रदर्शनों में बिल्कुल भी रुचि नहीं रखते हैं। बल्कि, वे भगवान व्यक्तित्व के परम के प्रति प्रेमपूर्ण भक्ति करने के उच्च कर्तव्यों में रुचि रखते हैं। ऐसी भक्ति सेवा को नि: त्रिगुण्य कहा जाता है। भगवान को समर्पित सेवा का शरीर के आराम की भौतिक अवधारणा से कोई लेना-देना नहीं है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥