त्रैगुण्य-विषया वेदा
निस्त्रैगुण्यो भवार्जुन
निर्द्वन्द्वो नित्य-सत्त्व-स्थो
निर्योग-क्षेम आत्मवान
"वेद मुख्य रूप से भौतिक प्रकृति के तीन प्रकार के विषयों से संबंधित हैं। इन तरीकों से ऊपर उठो, हे अर्जुन। उन सभी के प्रति पारलौकिक बनो। सभी द्वंद्वों से मुक्त हो जाओ और लाभ और सुरक्षा के लिए सभी चिंताओं से मुक्त हो जाओ, और आत्म में स्थापित हो जाओ।"
वेदों में अनुशंसित कर्मकांड प्रदर्शन मुख्य रूप से भौतिक प्रकृति के तीन प्रकार के विषयों पर निर्भर करते हैं। फलस्वरूप अर्जुन को वैदिक गतिविधियों से परे जाने की सलाह दी गई। अर्जुन को जिन गतिविधियों को करने की सलाह दी गई थी वे भक्ति सेवा की पारलौकिक गतिविधियाँ थीं।
