तत्पश्चात् राजा पृथु ने उन भगवान् को नमस्कार किया जो समस्त देवों के परम स्वामी हैं। हालाँकि वे भौतिक दृष्टि से दिखाई नहीं देते, फिर भी उन्होंने स्वयं को महाराजा पृथु को दिखाया। भगवान् को नमन करने के बाद राजा अपने घर वापस चले गए।
Thereafter King Prithu offered his respectful obeisances unto the Lord, the Supreme Lord of all demigods. Although He is not an object to be seen with the physical eye, the Lord manifested Himself before the eyes of Maharaja Prithu. After offering obeisances unto the Lord the King returned to his home.
तात्पर्य
सर्वोच्च भगवान भौतिक आँखों से दिखाई नहीं देते, लेकिन जब भौतिक इंद्रियाँ भगवान की दिव्य प्रेमपूर्ण सेवा की ओर झुकती हैं और इस प्रकार पवित्र हो जाती हैं, तो भगवान स्वयं भक्त की दृष्टि से प्रकट होते हैं। अव्यक्त का अर्थ है "अप्रकट"। यद्यपि भौतिक संसार सर्वोच्च भगवान का सृजन है, पर वे भौतिक आँखों से अप्रकट हैं। हालाँकि, महाराज पृथु ने अपनी विशुद्ध भक्ति सेवा के द्वारा आध्यात्मिक आँखें विकसित कीं। इसलिए, यहाँ भगवान को संदर्शितात्मा के रूप में वर्णित किया गया है, क्योंकि वे भक्त की दृष्टि से स्वयं को प्रकट करते हैं, यद्यपि वे सामान्य आँखों से दिखाई नहीं देते।
इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध चार के अंतर्गत बीसवाँ अध्याय समाप्त होता है ।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥