Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 4.2.3: हे मैत्रेय, मनुष्य के लिए अपने प्राणों को त्याग पाना बहुत मुश्किल है। कृपा करके मुझे बताएं कि इस दामाद और ससुर के बीच इतना कटु विवाद कैसे हुआ कि महान देवी सती को जान की आहुति देनी पड़ी? | bhagavat अध्याय 4.2: दक्ष द्वारा शिवजी को शाप । bhagavat स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एतदाख्याहि मे ब्रह्मन्जामातु: श्वशुरस्य च ।
विद्वेषस्तु यत: प्राणांस्तत्यजे दुस्त्यजान्सती ॥ ३ ॥
अनुवाद
हे मैत्रेय, मनुष्य के लिए अपने प्राणों को त्याग पाना बहुत मुश्किल है। कृपा करके मुझे बताएं कि इस दामाद और ससुर के बीच इतना कटु विवाद कैसे हुआ कि महान देवी सती को जान की आहुति देनी पड़ी?
O Maitreya, it is very difficult for a human being to give up his life. Can you tell me why there was such a bitter animosity between a son-in-law and a father-in-law that forced the great goddess Sati to give up her life?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥