शिव पूजा का व्रत लेने वाले इतने मूर्ख होते हैं कि उसके समान ही अपने सिर पर जटा रखने लगते हैं, शिव की उपासना की दीक्षा लेने के बाद मदिरा, मांस आदि पदार्थों को अपना भोजन बना लेते हैं।
Those who vow to worship Shiva are so foolish that they imitate them and wear long matted locks on their bodies and after being initiated into the worship of Shiva, they like to eat and drink wine, meat and other such things.
तात्पर्य
मदिरा और मांस का आनंद लेना, एक के सिर पर लंबे बाल रखना, प्रतिदिन स्नान न करना और गांजा (मारिजुआना) धूम्रपान करना ये कुछ ऐसी आदतें हैं जो मूर्ख प्राणियों द्वारा स्वीकार की जाती हैं जिनके जीवन विनियमित नहीं होते हैं। इस तरह के व्यवहार से व्यक्ति पारलौकिक ज्ञान से रहित हो जाता है। शिव मंत्र में दीक्षा में, मुद्रिकाष्टक होते हैं, जिसमें कभी-कभी यह अनुशंसा की जाती है कि वह अपनी बैठने की जगह योनि बनाकर निर्वाण या अस्तित्व के विघटन की इच्छा करे। पूजा की उस प्रक्रिया में, मदिरा की आवश्यकता होती है, या कभी-कभी, मदिरा के स्थान पर, ताड़ के पेड़ का रस, जो एक नशीले पदार्थ में परिवर्तित हो जाता है। यह भी शिव-आगम के अनुसार दिया जाता है, जो भगवान शिव की पूजा करने की विधि पर एक शास्त्र है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥