श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 2: दक्ष द्वारा शिवजी को शाप  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  4.2.18 
अयं तु देवयजन इन्द्रोपेन्द्रादिभिर्भव: ।
सह भागं न लभतां देवैर्देवगणाधम: ॥ १८ ॥
 
 
अनुवाद
देवतागण तो यज्ञ की आहुति में भाग ले सकते हैं, परन्तु शिव जो सभी देवताओं में सबसे निम्न है, उसे यज्ञ में कोई भाग नहीं मिलना चाहिए।
 
देवतागण तो यज्ञ की आहुति में भाग ले सकते हैं, परन्तु शिव जो सभी देवताओं में सबसे निम्न है, उसे यज्ञ में कोई भाग नहीं मिलना चाहिए।
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas