श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 19: राजा पृथु के एक सौ अश्वमेध यज्ञ  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  4.19.9 
सिन्धवो रत्ननिकरान् गिरयोऽन्नं चतुर्विधम् ।
उपायनमुपाजह्रु: सर्वे लोका: सपालका: ॥ ९ ॥
 
 
अनुवाद
सामान्य लोगों और सभी लोकों के प्रमुख देवताओं ने राजा पृथु को विभिन्न उपहार भेंट किए। समुद्र अनमोल रत्नों और पर्वत रसायनों और उर्वरकों से भरे थे। चारों तरह के खाने-पीने के पदार्थ भरपूर मात्रा में पैदा होते थे।
 
सामान्य लोगों और सभी लोकों के प्रमुख देवताओं ने राजा पृथु को विभिन्न उपहार भेंट किए। समुद्र अनमोल रत्नों और पर्वत रसायनों और उर्वरकों से भरे थे। चारों तरह के खाने-पीने के पदार्थ भरपूर मात्रा में पैदा होते थे।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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