बहती हुई नदियाँ हर तरह के स्वाद—मीठा, खट्टा, चटपटा इत्यादि—देती थीं और बड़े-बड़े पेड़ खूब फल और शहद देते थे। गायें खूब हरी घास खाकर ढेर सारा दूध, दही, घी और दूसरी ज़रूरत की चीज़ें देती थीं।
Flowing rivers started providing all kinds of tastes—sweet, sour, spicy, etc.—and big trees started giving fruits and honey in abundance. Cows started giving milk, curd, ghee and other essential items in abundance by eating enough green grass.
तात्पर्य
यदि नदियों को प्रदूषित नहीं किया जाए और उन्हें अपने स्वयं के रास्ते से बहने दिया जाए, या कभी-कभी भूमि को भरने दिया जाए, तो भूमि बहुत उपजाऊ बन जाएगी और सभी प्रकार की सब्जियां, पेड़ और पौधे उत्पन्न करने में सक्षम हो जाएगी। रस शब्द का अर्थ है "स्वाद"। वास्तव में सभी रस पृथ्वी के भीतर के स्वाद हैं, और जैसे ही बीज जमीन में बोए जाते हैं, हमारे विभिन्न स्वादों को संतुष्ट करने के लिए विभिन्न पेड़ उग आते हैं। उदाहरण के लिए, गन्ना अपने रस से हमारी मिठास के स्वाद को संतुष्ट करता है, और संतरे अपने रस से खट्टे और मीठे के मिश्रण के स्वाद को संतुष्ट करते हैं। इसी तरह, अनानास और अन्य फल हैं। इसी समय, हमारे तीखेपन के स्वाद को संतुष्ट करने के लिए मिर्च हैं। यद्यपि पृथ्वी का मैदान एक ही है, विभिन्न प्रकार के बीजों के कारण विभिन्न स्वाद उत्पन्न होते हैं। जैसा कि कृष्ण भगवद्गीता (7.10) में कहते हैं, बीजं माम सर्व-भूतानम: "मैं सभी अस्तित्वों का मूल बीज हूं"। इसलिए सभी व्यवस्थाएँ वहाँ हैं। और जैसा कि "ईशा उपनिषद" में कहा गया है, पूर्णम इदम: जीवन की सभी आवश्यकताओं के उत्पादन के लिए पूरी व्यवस्था ईश्वर के सर्वोच्च व्यक्तित्व द्वारा की जाती है। इसलिए लोगों को यह सीखना चाहिए कि यज्ञ-पुरुष, भगवान विष्णु को कैसे संतुष्ट किया जाए। वास्तव में, जीव का प्रमुख व्यवसाय भगवान को संतुष्ट करना है क्योंकि जीव भगवान का अंश है। इस प्रकार पूरी व्यवस्था इतनी व्यवस्थित है कि जीव को अपना कर्तव्य वैसा ही करना चाहिए जैसा कि उसका संविधान है। ऐसा किए बिना, सभी जीवों को कष्ट उठाना होगा। यह प्रकृति का नियम है। तारवो भूरी-वर्षमाण शब्द बहुत ही भारी-भरकम पेड़ों को इंगित करता है। इन पेड़ों का उद्देश्य शहद और फलों की किस्मों का उत्पादन करना था। दूसरे शब्दों में, वन का भी अपना उद्देश्य है जो शहद, फल और फूलों की पूर्ति करता है। दुर्भाग्य से कलि-युग में, यज्ञ की अनुपस्थिति के कारण, जंगलों में कई बड़े पेड़ हैं, लेकिन वे पर्याप्त फल और शहद की आपूर्ति नहीं करते हैं। इस प्रकार सब कुछ यज्ञ के प्रदर्शन पर निर्भर है। इस युग में यज्ञ करने का सबसे अच्छा तरीका है संकीर्तन आंदोलन को पूरे विश्व में फैलाना|
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥