Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 4.19.42: सभी महान ऋषियों और ब्राह्मणों ने कहा: हे पराक्रमी राजा, आपके निमंत्रण पर सभी वर्ग के जीवों ने इस सभा में भाग लिया है। वे पितृलोक और स्वर्गलोक से आए हैं और महान ऋषि और सामान्य लोग भी इस सभा में उपस्थित हुए हैं। अब वे आपके व्यवहार और आपके दान से अत्यंत संतुष्ट हैं। | bhagavat अध्याय 4.19: राजा पृथु के एक सौ अश्वमेध यज्ञ । bhagavat स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सभी महान ऋषियों और ब्राह्मणों ने कहा: हे पराक्रमी राजा, आपके निमंत्रण पर सभी वर्ग के जीवों ने इस सभा में भाग लिया है। वे पितृलोक और स्वर्गलोक से आए हैं और महान ऋषि और सामान्य लोग भी इस सभा में उपस्थित हुए हैं। अब वे आपके व्यवहार और आपके दान से अत्यंत संतुष्ट हैं।
All the sages and Brahmins said: O mighty king, on your invitation, living beings of all classes have participated in this assembly. They have come from Pitriloka and Swargaloka, along with common people and sages have also attended this assembly. Now all of them are very satisfied with your behavior and your donations.
इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध चार के अंतर्गत उन्नीसवाँ अध्याय समाप्त होता है ।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥