Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 4.19.39: महर्षि मैत्रेय ने आगे कहा: जब परम गुरु ब्रह्माजी ने राजा पृथु को इस प्रकार समझाया तो उन्होंने यज्ञ करने की अपनी इच्छा त्याग दी और राजा इंद्र के साथ मित्रतापूर्ण संबंध स्थापित कर लिए। | bhagavat अध्याय 4.19: राजा पृथु के एक सौ अश्वमेध यज्ञ । bhagavat स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मैत्रेय उवाच
इत्थं स लोकगुरुणा समादिष्टो विशाम्पति: ।
तथा च कृत्वा वात्सल्यं मघोनापि च सन्दधे ॥ ३९ ॥
अनुवाद
महर्षि मैत्रेय ने आगे कहा: जब परम गुरु ब्रह्माजी ने राजा पृथु को इस प्रकार समझाया तो उन्होंने यज्ञ करने की अपनी इच्छा त्याग दी और राजा इंद्र के साथ मित्रतापूर्ण संबंध स्थापित कर लिए।
Maharishi Maitreya further said: When the Supreme Guru Brahmaji instructed King Prithu in this manner, he gave up his eagerness to perform the yajna and very affectionately entered into a treaty with King Indra.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥