हे राजन्! दैवीय हस्तक्षेप के कारण आपका यज्ञ विधिवत संपन्न न हो पाने पर आप क्षुब्ध और चिंतित न हों। कृपया मेरे वचनों को आदरपूर्वक सुनें। यह सदैव याद रखना चाहिए कि जो कुछ भी प्रारब्ध से घटता है, उसके लिए हमें अत्यधिक दुखी नहीं होना चाहिए। ऐसी पराजयों को ठीक करने का जितना अधिक प्रयास किया जाता है, उतना ही हम भौतिकवादी विचारों के गहरे अंधेरे में प्रवेश करते हैं।
O King, do not be agitated or worried if your yajna is not performed properly due to divine interference. Please accept my words with great respect. Always remember that we should not be too sad about what happens due to destiny. The more we try to rectify such failures, the more we enter into the darkness of materialistic thinking.
तात्पर्य
कभी-कभी संत या अत्यंत धार्मिक व्यक्तियों को भी जीवन में असफलताएँ झेलनी पड़ जाती है। ऐसी घटनाओं को प्रभु द्वारा भेजा हुआ मानकर स्वीकार कर लेना चाहिए। यदि दुःखी होने का पर्याप्त कारण है, तो भी इस प्रकार के दुःखों का बदला लेने या विरोध करने से बचना चाहिए क्योंकि जितना अधिक हम इस प्रकार के दुःखों में सुधार लाने के लिए उलझेंगे, उतना ही अधिक हम भौतिक चिंता के सबसे अंधेरे क्षेत्रों में प्रवेश करेंगे। भगवान कृष्ण ने भी इस संबंध में हमें सलाह दी है: हमें परेशान होने के बजाय चीजों को सहन करना चाहिए।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥