जब पुरोहितों और बाकी लोगों ने महाराज पृथु को बहुत क्रोधित और इंद्र को मारने को तैयार देखा तो उन्होंने निवेदन किया: हे महात्मा, उसे न मारें, क्योंकि यज्ञ में केवल यज्ञ-पशु का ही वध किया जा सकता है। शास्त्रों में ऐसे ही निर्देश दिए गए हैं।
When the priests and others saw Maharaja Prithu very angry and ready to kill Indra, they prayed: O great soul, do not kill him, because only a sacrificial animal can be killed in a yajna. Such are the orders given in the scriptures.
तात्पर्य
पशु-वध विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया जाता है। इसके अंतर्गत वैदिक मंत्रों के उचित उच्चारण का परीक्षण किया जाता है, साथ ही बलि में दिए गए पशु को एक नए जीवन के साथ बाहर आना चाहिए। भगवान विष्णु की संतुष्टि के लिए किए गए बलिदान में कभी भी किसी को नहीं मारना चाहिए। तब इंद्र को कैसे मारा जा सकता है जब वास्तव में यज्ञ में उनकी पूजा की जाती है और उन्हें भगवान के पूर्ण रूप का हिस्सा माना जाता है? इसलिए, याजकों ने राजा पृथु से उनका वध न करने का अनुरोध किया।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥