तदभिज्ञाय भगवान्पृथु: पृथुपराक्रम: ।
इन्द्राय कुपितो बाणमादत्तोद्यतकार्मुक: ॥ २६ ॥
अनुवाद
अत्यन्त पराक्रमी महाराज पृथु ने तुरन्त अपना धनुष-बाण लिया और वे इन्द्र को मारने के लिए सिद्ध हुए, क्योंकि इन्द्र ने इस प्रकार के अनियमित संन्यास का प्रचार-प्रसार किया था।
Maharaja Prithu, the very mighty one, immediately took up his bow and arrow and prepared to kill Indra, because Indra had initiated this type of irregular renunciation.
तात्पर्य
राजा का दायित्व है कि वह किसी भी अधार्मिक व्यवस्थाओं को प्रवेश नहीं करने दे। चूँकि राजा पृथु स्वयं परमेश्वर के अवतार थे, निश्चित रूप से उनका कर्तव्य था की वो सभी प्रकार की अधार्मिक व्यवस्थाओं को काट कर खत्म कर दें। उनके पदचिन्हों का अनुसरण करते हुए राज्य के प्रत्येक प्रमुख को स्वयं को ईश्वर का वास्तविक प्रतिनिधि होना चाहिए और सभी अधार्मिक व्यवस्थाओं को काट कर खत्म कर देना चाहिए। दुर्भाग्यवश वे कायर हैं जो एक धर्मनिरपेक्ष राज्य की घोषणा करते हैं। ऐसी मानसिकता धार्मिक और अधार्मिक व्यवस्थाओं में समझौता करने का तरीका है, लेकिन इस वजह से नागरिक आमतौर पर आध्यात्मिक उन्नति में अरूचि रखने वाले बन जाते हैं। इस प्रकार स्थिति इस हद तक खराब हो जाती है कि मानव समाज नरक बन जाता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥