Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 4.19.17: जब इन्द्र ने देखा कि पृथु का पुत्र उसका पीछा कर रहा है, तो उसने तुरंत ही अपना बनावटी रूप त्याग दिया और घोड़े को छोड़कर उस स्थान से अंतर्धान हो गया। महाराज पृथु का वीर पुत्र घोड़ा लेकर अपने पिता के यज्ञस्थल में लौट आया। | bhagavat अध्याय 4.19: राजा पृथु के एक सौ अश्वमेध यज्ञ । bhagavat स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सोऽश्वं रूपं च तद्धित्वा तस्मा अन्तर्हित: स्वराट् ।
वीर: स्वपशुमादाय पितुर्यज्ञमुपेयिवान् ॥ १७ ॥
अनुवाद
जब इन्द्र ने देखा कि पृथु का पुत्र उसका पीछा कर रहा है, तो उसने तुरंत ही अपना बनावटी रूप त्याग दिया और घोड़े को छोड़कर उस स्थान से अंतर्धान हो गया। महाराज पृथु का वीर पुत्र घोड़ा लेकर अपने पिता के यज्ञस्थल में लौट आया।
When Indra saw that Prithu's son was following him, he immediately gave up his disguise and leaving the horse behind, he disappeared from that place. The great and brave son of Maharaja Prithu returned to his father's place of sacrifice with the horse.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥