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श्लोक 4.19.13  |
अत्रिणा चोदितो हन्तुं पृथुपुत्रो महारथ: ।
अन्वधावत सङ्कुद्धस्तिष्ठ तिष्ठेति चाब्रवीत् ॥ १३ ॥ |
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| अनुवाद |
| जब अत्रि मुनि ने राजा पृथु के बेटे को राजा इन्द्र की चाल के बारे में बताया, तो वो बहुत क्रोधित हुआ और "रुक जा! रुक जा!!" कहते हुए इन्द्र का पीछा करने लगा ताकि उसे मार सके। |
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| जब अत्रि मुनि ने राजा पृथु के बेटे को राजा इन्द्र की चाल के बारे में बताया, तो वो बहुत क्रोधित हुआ और "रुक जा! रुक जा!!" कहते हुए इन्द्र का पीछा करने लगा ताकि उसे मार सके। |
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