जब अत्रि मुनि ने राजा पृथु के बेटे को राजा इन्द्र की चाल के बारे में बताया, तो वो बहुत क्रोधित हुआ और "रुक जा! रुक जा!!" कहते हुए इन्द्र का पीछा करने लगा ताकि उसे मार सके।
When Sage Atri told King Prithu's son about King Indra's trick, he became very angry and started chasing Indra to kill him, saying "Wait! Wait!!"
तात्पर्य
जब कोई क्षत्रिय अपने दुश्मन को चुनौती दता है तो वह 'तिष्ठ तिष्ठ' शब्दों का प्रयोग करता है। युद्ध के मैदान में रहते हुए कोई क्षत्रिय वहाँ से भाग नहीं सकता। परन्तु, यदि कोई क्षत्रिय डर के कारण युद्ध मैदान से भाग निकलता है और अपने शत्रु को अपनी पीठ दिखाता है तो उसे 'तिष्ठ तिष्ठ' शब्दों के प्रयोग से चुनौती दी जाती है। एक सच्चा क्षत्रिय कभी भी अपने शत्रु की पीठ में वार नहीं करता है और न ही एक सच्चा क्षत्रिय युद्ध मैदान में अपनी पीठ दिखाता है। क्षत्रिय सिद्धांत और आत्मा के अनुसार, या तो व्यक्ति विजय प्राप्त होता है अथवा युद्ध के मैदान में मर जाता है। यद्यपि राजा इंद्र स्वर्ग के राजा होने के नाते बहुत ऊँचे पद पर विराजमान थे, फिर भी यज्ञ के लिए अभिप्रेत घोड़े को चुराने के कारण उनका पतन हो गया। अतः वे क्षत्रिय सिद्धांतों का पालन किए बिना ही भाग निकले और पृथु के पुत्र को उन्हें 'तिष्ठ तिष्ठ' शब्दों से चुनौती देनी पड़ी।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥