श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 18: पृथु महाराज द्वारा पृथ्वी का दोहन  »  श्लोक 9-10
 
 
श्लोक  4.18.9-10 
वत्सं कल्पय मे वीर येनाहं वत्सला तव ।
धोक्ष्ये क्षीरमयान्कामाननुरूपं च दोहनम् ॥ ९ ॥
दोग्धारं च महाबाहो भूतानां भूतभावन ।
अन्नमीप्सितमूर्जस्वद्भगवान् वाञ्छते यदि ॥ १० ॥
 
 
अनुवाद
हे महानायक, जीवों के रक्षक, यदि आप जीवों को पर्याप्त अन्न देकर उनके कष्टों का निवारण करना चाहते हैं और यदि आप मुझे दुहकर उनका पोषण करना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको एक उपयुक्त बछड़ा, दूध रखने के लिए एक पात्र और एक दूध देने वाला व्यक्ति की व्यवस्था करनी होगी। जब मैं अपने बछड़े के प्रति अधिक स्नेही हो जाऊंगी, तो आप मुझसे दूध लेने की इच्छा पूरी कर पाएँगे।
 
O supreme warrior, protector of the living beings, if you want to relieve the sufferings of the people by giving them abundant food and if you want to nourish them by milking me, then for this you will have to arrange for a suitable calf and a milking trough. You will also have to arrange for a milkman. Since I will be very affectionate towards my calf, your desire to get milk from me will be fulfilled.
तात्पर्य
ये गाय दुहने के लिए अच्छे निर्देश हैं। गाय के पास पहले एक बछड़ा होना चाहिए ताकि बछड़े के लिए स्नेह के कारण गाय स्वेच्छा से पर्याप्त दूध देगी। एक कुशल दूधिया और दूध रखने के लिए एक उपयुक्त बर्तन भी होना चाहिए। जिस प्रकार एक गाय अपने बछड़े के प्रति स्नेह के बिना पर्याप्त दूध नहीं दे सकती, उसी प्रकार पृथ्वी भी कृष्ण-भावनाभिन्‍न लोगों के लिए स्नेह महसूस किए बिना पर्याप्त उपहार उत्‍पन्‍न नहीं कर सकती। भले ही गाय के रूप में पृथ्वी का अस्तित्‍व आलंकारिक रूप से लिया जा सकता है, लेकिन यहां इसका अर्थ बहुत स्‍पष्‍ट है। जिस प्रकार एक बछड़ा गाय से दूध ले सकता है, उसी प्रकार सभी जीवित प्राणी - पशुओं, पक्षियों, मधुमक्खियों, सरीसृपों और जलीय प्राणियों सहित - ग्रह पृथ्वी से अपना भोजन प्राप्त कर सकते हैं, बशर्ते कि इंसान असत या अधृत-व्रत न हों, जैसा कि हमने पहले चर्चा की है। जब मानव समाज असत या अधर्मी या कृष्ण-भावना से रहित हो जाता है, तो पूरी दुनिया को नुकसान होता है। यदि इंसान विनम्र होंगे, तो जानवरों को भी पर्याप्त भोजन मिलेगा और वे खुश रहेंगे। अधर्मी इंसान, जो जानवरों को सुरक्षा और भोजन देने के अपने कर्तव्य से अनभिज्ञ हैं, अनाज के अपर्याप्त उत्‍पादन की भरपाई के लिए उन्‍हें मार देते हैं। इस प्रकार कोई भी संतुष्ट नहीं होता है, और आज की दुनिया की वर्तमान स्थिति इसका कारण है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)