श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 18: पृथु महाराज द्वारा पृथ्वी का दोहन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  4.18.6 
पुरा सृष्टा ह्योषधयो ब्रह्मणा या विशाम्पते ।
भुज्यमाना मया द‍ृष्टा असद्‌भिरधृतव्रतै: ॥ ६ ॥
 
 
अनुवाद
हे राजा, प्राचीन काल में ब्रह्मा जी ने जिन बीजों, जड़ों, औषधियों और अनाजों की सृष्टि की थी, उनका उपयोग अब वे अधर्मी लोग कर रहे हैं, जिनके पास आध्यात्मिक ज्ञान का कोई अंश नहीं है।
 
हे राजा, प्राचीन काल में ब्रह्मा जी ने जिन बीजों, जड़ों, औषधियों और अनाजों की सृष्टि की थी, उनका उपयोग अब वे अधर्मी लोग कर रहे हैं, जिनके पास आध्यात्मिक ज्ञान का कोई अंश नहीं है।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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