वह मूर्ख व्यक्ति जो अपनी मानसिक कल्पनाओं के माध्यम से अपने निजी साधन और तरीके बनाता है और साधुओं द्वारा स्थापित निर्दोष आदेशों को मान्यता नहीं देता, वह अपने प्रयासों में बार-बार असफल होता है।
A foolish man who by his imagination creates his own means and means and does not recognize the flawless orders established by the sages, fails again and again in his efforts.
तात्पर्य
वर्तमान समय में आचार्यों और अतीत की मुक्त आत्माओं द्वारा दिए गए निर्विवाद निर्देशों की अवज्ञा करना फैशनेबल हो गया है। वर्तमान में लोग इतने पतित हो गए हैं कि वे मुक्त आत्मा और बद्ध आत्मा में अंतर नहीं कर पा रहे हैं। एक बद्ध आत्मा को चार दोषों से बाधा होती है: वह ज़रूर गलतियाँ करेगा, वह ज़रूर मोहित हो जाएगा, उसमें दूसरों को धोखा देने की प्रवृत्ति होती है, और उसकी इंद्रियाँ अपूर्ण होती हैं। इसलिए हमें मुक्त व्यक्तियों से निर्देश लेना होगा। यह कृष्ण चेतना आंदोलन सीधे भगवान के सर्वोच्च व्यक्तित्व से उन व्यक्तियों के माध्यम से निर्देश प्राप्त करता है जो उनके निर्देशों का पूरी तरह से पालन कर रहे हैं। हालाँकि एक अनुयायी मुक्त व्यक्ति नहीं हो सकता है, लेकिन अगर वह भगवान के सर्वोच्च, मुक्त व्यक्तित्व का अनुसरण करता है, तो उसके कार्य स्वाभाविक रूप से भौतिक प्रकृति के संदूषण से मुक्त हो जाते हैं। इसलिए भगवान चैतन्य कहते हैं, "मेरे आदेश से तुम गुरु बन सकते हो।" भगवान के सर्वोच्च व्यक्तित्व के वास्तविक शब्दों पर पूरा विश्वास रखने और उनके निर्देशों का पालन करने से व्यक्ति तुरंत एक आध्यात्मिक गुरु बन सकता है। भौतिकवादी लोगों की मुक्त व्यक्ति के निर्देश लेने में कोई दिलचस्पी नहीं है, लेकिन वे अपने स्वयं के विपरीत विचारों में बहुत रुचि रखते हैं, जिससे वे अपनी उलझनों को दोहराते रहते हैं। क्योंकि पूरी दुनिया अब बद्ध आत्माओं के अपूर्ण निर्देशों का पालन कर रही है, मानवता पूरी तरह से चकित है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥