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bhagavat 4.18.28: इसके बाद, राजा पृथु पृथ्वी से बहुत संतुष्ट हुए क्योंकि उसने विभिन्न जीवों के लिए पर्याप्त भोजन की आपूर्ति की। इस प्रकार, पृथ्वी के प्रति राजा का स्नेह बढ़ गया, जैसे वह उनकी अपनी बेटी हो।   |   bhagavat अध्याय 4.18: पृथु महाराज द्वारा पृथ्वी का दोहन   ।   bhagavat स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 18: पृथु महाराज द्वारा पृथ्वी का दोहन  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  4.18.28 
ततो महीपति: प्रीत: सर्वकामदुघां पृथु: ।
दुहितृत्वे चकारेमां प्रेम्णा दुहितृवत्सल: ॥ २८ ॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद, राजा पृथु पृथ्वी से बहुत संतुष्ट हुए क्योंकि उसने विभिन्न जीवों के लिए पर्याप्त भोजन की आपूर्ति की। इस प्रकार, पृथ्वी के प्रति राजा का स्नेह बढ़ गया, जैसे वह उनकी अपनी बेटी हो।
 
Thereafter King Prithu became very pleased with the Earth because it provided ample food for the various living entities. Thus the king became affectionate towards the Earth as if it were his daughter.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)