Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 4.18.25: बरगद के वृक्ष का बछड़ा बनाकर पेड़ों ने दूध के रूप में अनेकों स्वादिष्ट रस प्राप्त कर लिए। पर्वतों ने हिमालय को बछड़ा बनाकर और पहाड़ों की चोटियों को पात्र बनाकर उससे नाना प्रकार के कीमती पत्थर और धातुएँ प्राप्त कीं। | bhagavat अध्याय 4.18: पृथु महाराज द्वारा पृथ्वी का दोहन । bhagavat स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
बरगद के वृक्ष का बछड़ा बनाकर पेड़ों ने दूध के रूप में अनेकों स्वादिष्ट रस प्राप्त कर लिए। पर्वतों ने हिमालय को बछड़ा बनाकर और पहाड़ों की चोटियों को पात्र बनाकर उससे नाना प्रकार के कीमती पत्थर और धातुएँ प्राप्त कीं।
Trees made the banyan tree their calf and milked various kinds of delicious juices. Mountains made the Himalayas their calf and the mountain peaks their vessels and milked various kinds of metals.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥