श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 18: पृथु महाराज द्वारा पृथ्वी का दोहन  »  श्लोक 23-24
 
 
श्लोक  4.18.23-24 
पशवो यवसं क्षीरं वत्सं कृत्वा च गोवृषम् ।
अरण्यपात्रे चाधुक्षन्मृगेन्द्रेण च दंष्ट्रिण: ॥ २३ ॥
क्रव्यादा: प्राणिन: क्रव्यं दुदुहु: स्वे कलेवरे ।
सुपर्णवत्सा विहगाश्चरं चाचरमेव च ॥ २४ ॥
 
 
अनुवाद
गाय और अन्य चौपाये पशुओं ने भगवान शिव के वाहन, बैल को बछड़े और जंगल को दूध निकालने के बर्तन के रूप में इस्तेमाल किया। इस प्रकार उन्हें खाने के लिए ताजी हरी घास मिल गई। बाघ जैसे शिकारी जानवरों ने सिंह को बछड़े में बदल दिया और इस तरह वे दूध के रूप में मांस प्राप्त करने में सफल हो सके। पक्षियों ने गरुड़ को बछड़े के रूप में इस्तेमाल किया और पृथ्वी पर मौजूद पेड़-पौधों के साथ-साथ हिलते-डुलते कीटों के रूप में दूध प्राप्त किया।
 
Four-legged animals like cows made Shiva's vehicle bull into a calf and the forest into a milking vessel. Thus they got fresh green grass to eat. Predatory animals like tigers made lion into a calf and thus they could get meat in the form of milk. Birds made Garuda into a calf and obtained milk from the earth in the form of moving insects and non-moving grasses and plants.
तात्पर्य
गरुड़, भगवान विष्णु के पंख वाले वाहन से कई मांसाहारी पक्षियों की उत्पत्ति हुई। वास्तव में, एक विशेष प्रकार का पक्षी है जो बंदरों को खाने का बहुत शौकीन है, और चील बकरियों को खाने के बहुत शौकीन हैं। बेशक, कई पक्षी केवल फल और जामुन खाते हैं। इसलिए इस श्लोक में चरम, जो कि गतिशील जानवरों को संदर्भित करता है, और अचरम, जो कि घास, फल और सब्जियों को संदर्भित करता है, का उल्लेख किया गया है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)