अन्ये च मायिनो मायामन्तर्धानाद्भुतात्मनाम् ।
मयं प्रकल्प्य वत्सं ते दुदुहुर्धारणामयीम् ॥ २० ॥
अनुवाद
अन्य स्थानों पर, किम्पुरुष लोक के निवासियों ने भी दानव माया को बछड़ा बनाकर, योग संबंधी कुछ शक्तियों को दुहा, जिससे कोई व्यक्ति किसी की नजरों से ओझल हो सकता है और दूसरे रूप में प्रकट हो सकता है।
The inhabitants of Kimpurusha-loka also transformed the Maya demon into a calf and milked his yogic powers by which a man could instantly disappear from the sight of others and reappear in some other form.
तात्पर्य
कहा जाता है कि किम्पुरुष-लोक के निवासी अनेक अद्भुत और रहस्यमयी प्रदर्शन कर सकते हैं। दूसरे शब्दों में, वे जितनी चाहें उतनी आश्चर्यजनक चीजें प्रदर्शित कर सकते हैं। इस ग्रह के निवासी जो चाहें या उनकी जो भी कल्पना हो वह कर सकते हैं। ऐसी शक्तियाँ भी रहस्यमयी शक्तियाँ होती हैं। ऐसी रहस्यमयी शक्ति के धारण को ईशिता कहा जाता है। राक्षस आमतौर पर योग का अभ्यास करके ऐसी रहस्यमयी शक्तियाँ सीखते हैं। श्रीमद्-भागवतम के दशम स्कंध (दसवें कांड) में, राक्षसों के विविध आश्चर्यजनक रूपों में कृष्ण के समक्ष प्रकट होने का एक स्पष्ट वर्णन है। उदाहरण के लिए, बकासुर एक विशालकाय क्रेन के रूप में कृष्ण और उनके ग्वाला साथियों के सामने प्रकट हुआ। जब प्रभु कृष्ण इस ग्रह पर उपस्थित थे, तो उन्हें अनेक राक्षसों से युद्ध करना पड़ा जो किम्पुरुष लोक की आश्चर्यजनक रहस्यमयी शक्तियों का प्रदर्शन कर सकते थे। हालाँकि, किम्पुरुष लोक के निवासी स्वाभाविक रूप से ऐसी शक्तियों से संपन्न होते हैं, पर इस ग्रह पर भी व्यक्ति भिन्न-भिन्न योगिक क्रियाओं को करके इन शक्तियों को प्राप्त कर सकता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥