Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 4.18.12: पृथ्वी के शुभ और मनभावन वचनों को सुनकर, राजा ने उन्हें स्वीकार कर लिया। इसके बाद, उन्होंने स्वायंभुव मनु को बछड़ा बनाया और पृथ्वी से, जो गाय के रूप में थी, समस्त औषधियों और अनाजों का दोहन करके उन्हें अपने हाथों में भर लिया। | bhagavat अध्याय 4.18: पृथु महाराज द्वारा पृथ्वी का दोहन । bhagavat स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पृथ्वी के शुभ और मनभावन वचनों को सुनकर, राजा ने उन्हें स्वीकार कर लिया। इसके बाद, उन्होंने स्वायंभुव मनु को बछड़ा बनाया और पृथ्वी से, जो गाय के रूप में थी, समस्त औषधियों और अनाजों का दोहन करके उन्हें अपने हाथों में भर लिया।
The king accepted the beneficial and sweet words of the earth. Then he transformed Swayambhuva Manu into a calf and in the form of a cow, he milked all the medicines and food from the earth and filled his palms with them.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥