महर्षि मैत्रेय ने कहा : हे विदुर, जब ब्राह्मणों और ऋषियों ने राजा पृथु को सिंहासन पर बैठाया और उन्हें नागरिकों का रक्षक घोषित किया, तो उस समय अन्न की कमी थी। नागरिक भूख से इतने दुबले-पतले हो गए थे कि वे काँटे की तरह दिखने लगे थे। इसलिए वे राजा के सामने आए और उन्हें अपनी असली स्थिति बताई।
Maitreya continued: O Vidura, when the Brahmins and sages installed King Prithu on the throne and declared him the protector of the citizens, there was a scarcity of food grains at that time. The citizens had become skinny and thin due to hunger, so they came before the king and told him their real situation.
तात्पर्य
ब्राह्मणों द्वारा राजा के चयन के सम्बन्ध में यहाँ जानकारी दी गई है। वर्णाश्रम प्रणाली के अनुसार, ब्राह्मणों को समाज का शीर्ष माना जाता है और इसलिए उन्हें सबसे ऊपर सामाजिक स्थिति में स्थित माना जाता है। वर्णाश्रम-धर्म, चार वर्णों और चार आश्रमों की संस्था, बहुत वैज्ञानिक रूप से डिजाइन की गई है। जैसा कि भगवद-गीता में कहा गया है, वर्णाश्रम-धर्म एक मानव-निर्मित संस्था नहीं है, बल्कि ईश्वर-निर्मित है। इस कथन में यह स्पष्ट रूप से इंगित किया गया है कि ब्राह्मण राजकीय शक्ति को नियंत्रित करते थे। जब वेना जैसे दुष्ट राजा ने शासन किया, तो ब्राह्मण उन्हें अपनी ब्राह्मण शक्तियों से मार देते थे और उनकी योग्यताओं का परीक्षण करके एक उचित शासक का चयन करते थे। दूसरे शब्दों में, ब्राह्मण, बुद्धिमान पुरुष या महान ऋषि राजशाही शक्तियों को नियंत्रित करते थे। यहाँ हमारे पास इस बात का संकेत है कि कैसे ब्राह्मणों ने राजा पृथु को नागरिकों के रक्षक के रूप में सिंहासन के लिए चुना। नागरिक, भूख के कारण पतले होने के कारण, राजा के पास पहुँचे और उन्हें सूचित किया कि आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए। वर्णाश्रम-धर्म की संरचना इतनी अच्छी थी कि ब्राह्मण राज्य के प्रमुख का मार्गदर्शन करते थे। तत्पश्चात् राज्य का प्रमुख नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करता था। क्षत्रिय सामान्य रूप से लोगों की सुरक्षा का कार्यभार संभालते थे, और क्षत्रियों के संरक्षण में, वैश्य गायों की रक्षा करते थे, खाद्यान्न का उत्पादन करते थे और वितरित करते थे। शूद्र, श्रमिक वर्ग, मैनुअल श्रम द्वारा उच्च तीन वर्गों की मदद करते थे। यह एक आदर्श सामाजिक व्यवस्था है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥