सूत उवाच
चोदितो विदुरेणैवं वासुदेवकथां प्रति ।
प्रशस्य तं प्रीतमना मैत्रेय: प्रत्यभाषत ॥ ८ ॥
अनुवाद
सूत गोस्वामी ने आगे कहा: जब विदुर भगवान कृष्ण के विविध अवतारों की लीलाओं को सुनकर प्रेरित हुए, तो मैत्रेय भी प्रेरित हुए और विदुर से बहुत प्रसन्न होकर उनकी प्रशंसा करने लगे। तब मैत्रेय ने इस प्रकार कहा।
Suta Goswami continued: When Vidura was inspired to hear the activities of the various incarnations of Lord Krishna, Maitreya praised Vidura because he himself was encouraged and greatly pleased by them. Then Maitreya spoke as follows.
तात्पर्य
कृष्ण-कथा अर्थात् भगवान कृष्ण या उनके अवतारों से संबंधित विषयों के बारे में बातचीत आध्यात्मिक रूप से इतनी प्रेरक होती है कि कथन करने वाला और सुनने वाला कभी भी थकते नहीं हैं। यही आध्यात्मिक वार्ता की प्रकृति है। हमने वास्तव में देखा है कि विदुर और मैत्रेय के बीच की वार्तालापों को सुनकर कोई भी कभी तृप्त नहीं हो सकता। वे दोनों भक्त हैं, और विदुर जितना अधिक सवाल पूछते हैं, मैत्रेय उतना ही अधिक बोलने के लिए प्रोत्साहित होते हैं। आध्यात्मिक बातचीत का एक लक्षण यह है कि कोई भी थका हुआ महसूस नहीं करता। इस प्रकार विदुर के प्रश्नों को सुनने पर, महान ऋषि मैत्रेय को घृणा नहीं हुई बल्कि अधिक लंबाई में बोलने के लिए प्रोत्साहित महसूस किया।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥