अपामुपस्थे मयि नाव्यवस्थिता:
प्रजा भवानद्य रिरक्षिषु: किल ।
स वीरमूर्ति: समभूद्धराधरो
यो मां पयस्युग्रशरो जिघांससि ॥ ३५ ॥
अनुवाद
प्रभु, आपने एक बार मुझे पानी से बचाया था और तभी से आपका नाम धराधर पड़ा है। लेकिन अब आप एक महान योद्धा के रूप में अपने तीखे बाणों से मुझे मारने आए हैं। मैं पानी की नाव की तरह हूँ जो सभी को बचाए रखती है।
O Lord, in this way you once rescued me from the water, due to which you were called Dharadhara, i.e. the one who holds the earth. Yet at this time, in the form of a great warrior, you are ready to kill me with your sharp arrows. But I am like a boat in water which keeps everything afloat.
तात्पर्य
भगवान को धराधर के नाम से जाना जाता है, जिसका अर्थ है "जो वराह अवतार में अपने दांतों पर पृथ्वी को रखते हैं।" इस प्रकार गाय के आकार में पृथ्वी ग्रह भगवान के विरोधाभासी कार्यों का लेखा-जोखा कर रही है। हालाँकि उन्होंने एक बार पृथ्वी को बचाया था, लेकिन अब वह पृथ्वी को परेशान करना चाहते हैं, जो पानी पर एक नाव की तरह है। भगवान की गतिविधियों को कोई समझ नहीं सकता। ज्ञान की कमी के कारण, मनुष्य कभी-कभी भगवान की गतिविधियों को विरोधाभासी मानते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥