सर्व-धर्मान् परित्यज्य
माम् एकं शरणं व्रज
अहं त्वां सर्व-पापेभ्यो
मोक्षयिष्यामि मा शुचः
''सभी प्रकार के धर्मों का त्याग करो और सिर्फ़ मुझको ही अपना आश्रय बनाओ। मैं तुम्हें सभी पापपूर्ण प्रतिक्रियाओं से मुक्त कर दूँगा। डरो मत।''
श्रील भक्तिविनोद ठाकुर गाते हैं, ''मेरे प्रिय प्रभु, मेरे पास जो कुछ भी है - मेरे मन, सभी भौतिक आवश्यकताओं का केंद्र, अर्थात् मेरा घर, मेरा शरीर और इस शरीर से जुड़ी जो कुछ भी है - मैं अब आपके समक्ष समर्पण करता हूँ। अब आप पूरी तरह से स्वतंत्र हैं कि आप जो चाहें वह कर सकते हैं। यदि आप चाहें, तो आप मुझे मार सकते हैं, और यदि आप चाहें, तो आप मुझे बचा सकते हैं। किसी भी मामले में, मैं आपका शाश्वत सेवक हूँ, और आपको जो चाहें वह करने का पूरा अधिकार है।''
