त्वं खल्वोषधिबीजानि प्राक् सृष्टानि स्वयम्भुवा ।
न मुञ्चस्यात्मरुद्धानि मामवज्ञाय मन्दधी: ॥ २४ ॥
अनुवाद
तुमने अपनी समझ इतनी खो दी है कि मेरे आदेश के होते हुए भी, तुम जड़ी-बूटियों और अनाज के बीजों को नहीं सौंप रही हो, जिन्हें पहले ब्रह्मा ने बनाया था और जो तुम्हारे भीतर छिपे हुए हैं।
You have lost your wisdom in such a way that, in spite of my command, you are not giving the seeds of the herbs and grains, which were created by Brahma in the past and which are hidden within you.
तात्पर्य
ब्रह्माण्ड के सारे ग्रह रचते समय भगवान ब्रह्मा ने अनेक अनाज, लता, पादप और वृक्षों के बीज भी बनाये। जब पर्याप्त वर्षा होती है तब बीज अंकुरित होकर फल, अन्न, सब्जी आदि देते हैं। पृथु महाराज अपने आदर्श से यह बताते हैं कि जब भी अन्न का उत्पादन कम हो, सरकार के मुखिया को यह देखना चाहिए कि उत्पादन रूकने के क्या कारण हैं और स्थिति को सुधारने के लिए क्या करना चाहिए।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥