प्रवेपमाना धरणी निशाम्योदायुधं च तम् ।
गौ: सत्यपाद्रवद्भीता मृगीव मृगयुद्रुता ॥ १४ ॥
अनुवाद
जब पृथ्वी ने देखा कि राजा पृथु उसे मारने के लिए धनुष और बाण उठा रहे हैं, तो वह बहुत डर गई और कांपने लगी। फिर वह ठीक उसी तरह भागने लगी जैसे एक हिरण, जब कोई शिकारी उसका पीछा करता है तो तेजी से भागता है। राजा पृथु से डरते हुए उसने गाय का रूप धारण कर लिया और भागने लगी।
When the Earth saw that King Prithu was holding a bow and arrow to kill her, she began to tremble with fear. Then she ran away just as a deer runs fast when chased by a hunter. Fearing the king, the Earth took the form of a cow and began to run.
तात्पर्य
जैसे एक माँ अनेक बच्चे उत्पन्न करती है, नर और मादा, उसी प्रकार धरती माँ अपनी कोख से विविध प्रकार के जीवों को विविध आकारों में जन्म देती है। इस प्रकार धरती माँ का असंख्य आकार लेना संभव है। इस समय, राजा पृथु के प्रकोप से बचने के लिए, उसने गाय का रूप धारण किया। चूँकि गाय की कभी हत्या नहीं की जानी चाहिए, इसलिए धरती माँ ने राजा पृथु के बाणों से बचने के लिए गाय का रूप धारण करना बुद्धिमानी समझी। हालाँकि, राजा पृथु इस तथ्य को समझ सकते थे, और इसलिए उन्होंने गाय के आकार की पृथ्वी का पीछा करना बंद नहीं किया।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥