Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 4.17.1: ऋषि मैत्रेय ने आगे कहा : इस प्रकार महाराज पृथु की महिमा का गुणगान करने वाले गायक, उनके गुणों और वीरतापूर्ण कार्यों का वर्णन करते थे। अंत में, महाराज पृथु ने उन्हें सम्मानपूर्वक भेंटें दीं और उनका पूजन किया। | bhagavat अध्याय 4.17: महाराज पृथु का पृथ्वी पर कुपित होना । bhagavat स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मैत्रेय उवाच
एवं स भगवान् वैन्य: ख्यापितो गुणकर्मभि: ।
छन्दयामास तान् कामै: प्रतिपूज्याभिनन्द्य च ॥ १ ॥
अनुवाद
ऋषि मैत्रेय ने आगे कहा : इस प्रकार महाराज पृथु की महिमा का गुणगान करने वाले गायक, उनके गुणों और वीरतापूर्ण कार्यों का वर्णन करते थे। अंत में, महाराज पृथु ने उन्हें सम्मानपूर्वक भेंटें दीं और उनका पूजन किया।
Maitreya Rishi continued: Thus the singers who were singing the glories of Maharaja Prithu described his virtues and heroic deeds. At last Maharaja Prithu respectfully presented them with many gifts and worshipped them profusely.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥