श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 16: बन्दीजनों द्वारा राजा पृथु की स्तुति  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  4.16.9 
आप्याययत्यसौ लोकं वदनामृतमूर्तिना ।
सानुरागावलोकेन विशदस्मितचारुणा ॥ ९ ॥
 
 
अनुवाद
यह राजा, पृथु महाराज, अपनी प्यारी सी नज़र और चन्द्रमा जैसे खूबसूरत चेहरे से, जो नागरिकों के लिए हमेशा प्यार भरी मुस्कान लिए रहता है, सबके शांतिपूर्ण जीवन में और विकास करेगा।
 
यह राजा, पृथु महाराज, अपनी प्यारी सी नज़र और चन्द्रमा जैसे खूबसूरत चेहरे से, जो नागरिकों के लिए हमेशा प्यार भरी मुस्कान लिए रहता है, सबके शांतिपूर्ण जीवन में और विकास करेगा।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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