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श्लोक 4.16.8  |
देवेऽवर्षत्यसौ देवो नरदेववपुर्हरि: ।
कृच्छ्रप्राणा: प्रजा ह्येष रक्षिष्यत्यञ्जसेन्द्रवत् ॥ ८ ॥ |
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| अनुवाद |
| जब पानी की कमी के कारण बारिश नहीं होती है और नागरिक बड़ी मुसीबत में होते हैं तो यह राजवेषधारी भगवान् स्वर्ग के राजा इन्द्र के समान बरसात करवाएगा। इस प्रकार वे नागरिकों की सूखे से रक्षा कर सकेगा। |
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| जब पानी की कमी के कारण बारिश नहीं होती है और नागरिक बड़ी मुसीबत में होते हैं तो यह राजवेषधारी भगवान् स्वर्ग के राजा इन्द्र के समान बरसात करवाएगा। इस प्रकार वे नागरिकों की सूखे से रक्षा कर सकेगा। |
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