श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 16: बन्दीजनों द्वारा राजा पृथु की स्तुति  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  4.16.8 
देवेऽवर्षत्यसौ देवो नरदेववपुर्हरि: ।
कृच्छ्रप्राणा: प्रजा ह्येष रक्षिष्यत्यञ्जसेन्द्रवत् ॥ ८ ॥
 
 
अनुवाद
जब पानी की कमी के कारण बारिश नहीं होती है और नागरिक बड़ी मुसीबत में होते हैं तो यह राजवेषधारी भगवान् स्वर्ग के राजा इन्द्र के समान बरसात करवाएगा। इस प्रकार वे नागरिकों की सूखे से रक्षा कर सकेगा।
 
जब पानी की कमी के कारण बारिश नहीं होती है और नागरिक बड़ी मुसीबत में होते हैं तो यह राजवेषधारी भगवान् स्वर्ग के राजा इन्द्र के समान बरसात करवाएगा। इस प्रकार वे नागरिकों की सूखे से रक्षा कर सकेगा।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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