श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 16: बन्दीजनों द्वारा राजा पृथु की स्तुति  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  4.16.6 
वसु काल उपादत्ते काले चायं विमुञ्चति ।
सम: सर्वेषु भूतेषु प्रतपन् सूर्यवद्विभु: ॥ ६ ॥
 
 
अनुवाद
यह राजा पृथु सूर्यदेव के समान प्रतापी होगा, और जिस प्रकार सूर्यदेव अपना प्रकाश सबको समान रूप से वितरित करता है, उसी प्रकार राजा पृथु अपनी कृपा सबको समान रूप से वितरित करेगा। जिस प्रकार सूर्यदेव आठ महीने तक पानी को वाष्पित करता है और वर्षा ऋतु में उसे प्रचुर मात्रा में लौटा देता है, उसी प्रकार यह राजा भी नागरिकों से कर वसूल करेगा और ज़रूरत के समय यह धन लौटा देगा।
 
यह राजा पृथु सूर्यदेव के समान प्रतापी होगा, और जिस प्रकार सूर्यदेव अपना प्रकाश सबको समान रूप से वितरित करता है, उसी प्रकार राजा पृथु अपनी कृपा सबको समान रूप से वितरित करेगा। जिस प्रकार सूर्यदेव आठ महीने तक पानी को वाष्पित करता है और वर्षा ऋतु में उसे प्रचुर मात्रा में लौटा देता है, उसी प्रकार यह राजा भी नागरिकों से कर वसूल करेगा और ज़रूरत के समय यह धन लौटा देगा।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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