श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 16: बन्दीजनों द्वारा राजा पृथु की स्तुति  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  4.16.25 
एष स्वसद्मोपवने समेत्यसनत्कुमारं भगवन्तमेकम् ।
आराध्य भक्त्यालभतामलं तज्ज्ञानं यतो ब्रह्म परं विदन्ति ॥ २५ ॥
 
 
अनुवाद
यह राजा पृथु अपने प्रासाद परिसर के उद्यान में चार कुमारों में से एक, सनत्कुमार से भेंट करेंगे। राजा उनकी भक्तिपूर्वक पूजा करेंगे और सौभाग्यवश उन्हें ऐसे उपदेश प्राप्त होंगे जिनसे मनुष्य दिव्य आनंद प्राप्त कर सकता है।
 
यह राजा पृथु अपने प्रासाद परिसर के उद्यान में चार कुमारों में से एक, सनत्कुमार से भेंट करेंगे। राजा उनकी भक्तिपूर्वक पूजा करेंगे और सौभाग्यवश उन्हें ऐसे उपदेश प्राप्त होंगे जिनसे मनुष्य दिव्य आनंद प्राप्त कर सकता है।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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