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bhagavat 4.16.22: यह राजा, जो प्रजा का पालनकर्ता है, सबसे अद्वितीय राजा हैं और प्रजापति देवों के समान हैं। सभी प्रजा के जीवनयापन के लिए, यह पृथ्वी को गाय की तरह दोहते रहेंगे। इतना ही नहीं, यह अपने बाण की नोक से सभी पर्वतों को काटकर धरती को समतल कर देंगे, जैसे स्वर्ग का राजा इंद्र अपने शक्तिशाली वज्र से पर्वतों को तोड़ते हैं।   |   bhagavat अध्याय 4.16: बन्दीजनों द्वारा राजा पृथु की स्तुति   ।   bhagavat स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 16: बन्दीजनों द्वारा राजा पृथु की स्तुति  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  4.16.22 
अयं महीं गां दुदुहेऽधिराज:प्रजापतिर्वृत्तिकर: प्रजानाम् ।
यो लीलयाद्रीन् स्वशरासकोट्याभिन्दन् समां गामकरोद्यथेन्द्र: ॥ २२ ॥
 
 
अनुवाद
यह राजा, जो प्रजा का पालनकर्ता है, सबसे अद्वितीय राजा हैं और प्रजापति देवों के समान हैं। सभी प्रजा के जीवनयापन के लिए, यह पृथ्वी को गाय की तरह दोहते रहेंगे। इतना ही नहीं, यह अपने बाण की नोक से सभी पर्वतों को काटकर धरती को समतल कर देंगे, जैसे स्वर्ग का राजा इंद्र अपने शक्तिशाली वज्र से पर्वतों को तोड़ते हैं।
 
This king, the protector of his subjects, is unique and is equal to Prajapati Devas. He will milk the earth in the form of a cow for the sustenance of his subjects. Not only this, he will pierce all the mountains with the tip of his arrow and flatten the earth in the same way as the King of Heaven Indra breaks mountains with his powerful thunderbolt.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)