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श्लोक 4.16.14  |
अस्याप्रतिहतं चक्रं पृथोरामानसाचलात् ।
वर्तते भगवानर्को यावत्तपति गोगणै: ॥ १४ ॥ |
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| अनुवाद |
| जिस प्रकार सूर्यदेव अपनी प्रकाशित किरणों को आर्कटिक क्षेत्र तक निर्बाध रूप से फैलाता है, उसी प्रकार राजा पृथु का प्रभाव आर्कटिक क्षेत्र तक सभी भूमि को व्याप्त करेगा और जीवन भर अडिग रहेगा। |
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| जिस प्रकार सूर्यदेव अपनी प्रकाशित किरणों को आर्कटिक क्षेत्र तक निर्बाध रूप से फैलाता है, उसी प्रकार राजा पृथु का प्रभाव आर्कटिक क्षेत्र तक सभी भूमि को व्याप्त करेगा और जीवन भर अडिग रहेगा। |
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