ऐसे गुणों का समर्थन करने में सक्षम एक बुद्धिमान व्यक्ति अपने अनुयायियों को उनकी प्रशंसा कैसे करने दे सकता है यदि उसके पास वास्तव में वे गुण न हों? किसी व्यक्ति की प्रशंसा यह कहकर करना कि यदि वह शिक्षित होता तो एक महान विद्वान या महान व्यक्तित्व बन जाता, तो यह धोखाधड़ी के अलावा और कुछ नहीं। मूर्ख व्यक्ति जो इस तरह की प्रशंसा को स्वीकार करता है, उसे यह पता नहीं होता है कि ऐसे शब्द उसके अपमान के अलावा कुछ नहीं हैं।
How can a wise man capable of possessing such great qualities allow his followers to praise him for qualities that he does not really possess? Praising a man by saying that if he is educated he will become a great scholar or a great man is nothing but cheating? The foolish person who accepts such praise does not know that such words are nothing but an insult to him.
तात्पर्य
पृथु महाराज भगवान के सर्वोच्च व्यक्तित्व के अवतार थे, जैसा कि भगवान ब्रह्मा और अन्य देवताओं ने पहले ही साक्षी दी थी जब उन्होंने राजा को कई स्वर्गीय उपहार दिए थे। हालाँकि, क्योंकि उनका अभी-अभी राज्याभिषेक हुआ था, वह अपने दिव्य गुणों को कार्य रूप में प्रकट नहीं कर सके। इसलिए वह भक्तों की प्रशंसा स्वीकार करने को इच्छुक नहीं थे। इसलिए भगवान के तथाकथित अवतारों को राजा पृथु के व्यवहार से सबक लेना चाहिए। ईश्वरीय गुणों के बिना राक्षसों को अपने अनुयायियों से झूठी प्रशंसा स्वीकार नहीं करनी चाहिए।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥