Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 4.15.14: तब ऋषि ने आगे कहा, हे विदुर, कुबेर ने महान राजा पृथु को स्वर्णमय सिंहासन भेंट किया और देवता वरुण ने उन्हें ऐसा छाता प्रदान किया जिससे लगातार जल की फुहारें निकल रही थीं और जो चंद्रमा के समान प्रकाशमान था। | bhagavat अध्याय 4.15: राजा पृथु की उत्पत्ति और राज्याभिषेक । bhagavat स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तब ऋषि ने आगे कहा, हे विदुर, कुबेर ने महान राजा पृथु को स्वर्णमय सिंहासन भेंट किया और देवता वरुण ने उन्हें ऐसा छाता प्रदान किया जिससे लगातार जल की फुहारें निकल रही थीं और जो चंद्रमा के समान प्रकाशमान था।
The sage continued, O Vidura, Kubera presented the great king Prithu with a golden throne; the god Varuna presented an umbrella from which water was continually spraying and which was as luminous as the moon.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥