Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 4.15.12: अपनी-अपनी शक्ति के मुताबिक, नदी, समुद्र, पहाड़, सांप, गाय, चिड़िया, जानवर, स्वर्ग के देवता, धरती के लोग और दूसरे लोक की सभी जीवित आत्माओं ने राजा को भेंट करने के लिए तरह-तरह के उपहार इकट्ठा किए। | bhagavat अध्याय 4.15: राजा पृथु की उत्पत्ति और राज्याभिषेक । bhagavat स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अपनी-अपनी शक्ति के मुताबिक, नदी, समुद्र, पहाड़, सांप, गाय, चिड़िया, जानवर, स्वर्ग के देवता, धरती के लोग और दूसरे लोक की सभी जीवित आत्माओं ने राजा को भेंट करने के लिए तरह-तरह के उपहार इकट्ठा किए।
According to their respective powers, the souls of rivers, seas, mountains, snakes, cows, birds, animals, heaven, earth and all other worlds collected various gifts to present to the king.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥