एवं मदान्ध उत्सिक्तो निरङ्कुश इव द्विप: ।
पर्यटन् रथमास्थाय कम्पयन्निव रोदसी ॥ ५ ॥
अनुवाद
अपने ऐश्वर्य के घमंड से जब राजा वेन पूर्ण रूप से अंधे हो गए तब वह एक रथ में बैठकर उसको बेकाबू हाथी की भाँति सम्पूर्ण राज्य में घूमने लगे। उनके जाने से आकाश और पृथ्वी दोनों ही हिलने लगते।
Blinded by the arrogance of his wealth, King Vena sat on a chariot and began to roam the entire kingdom like an unbridled elephant. Wherever he went, both the sky and the earth began to shake.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥