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श्लोक 4.13.44  |
यत: पापीयसी कीर्तिरधर्मश्च महान्नृणाम् ।
यतो विरोध: सर्वेषां यत आधिरनन्तक: ॥ ४४ ॥ |
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| अनुवाद |
| पापी पुत्र के कारण व्यक्ति का मान-सम्मान नष्ट हो जाता है। उसके घर में अधार्मिक कृत्यों से अधर्म और सभी के बीच झगड़ा फैलता है। इससे केवल अंतहीन चिंता ही पैदा होती है। |
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| पापी पुत्र के कारण व्यक्ति का मान-सम्मान नष्ट हो जाता है। उसके घर में अधार्मिक कृत्यों से अधर्म और सभी के बीच झगड़ा फैलता है। इससे केवल अंतहीन चिंता ही पैदा होती है। |
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