श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 13: ध्रुव महाराज के वंशजों का वर्णन  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  4.13.38 
सा तत्पुंसवनं राज्ञी प्राश्य वै पत्युरादधे ।
गर्भं काल उपावृत्ते कुमारं सुषुवेऽप्रजा ॥ ३८ ॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि रानी को कोई पुत्र न था, परंतु पुत्र उत्पन्न करने वाली शक्ति वाली उस खीर को खाने से वह अपने पति के सान्निध्य में रहकर गर्भवती हो गई और समय बीतने पर उसने एक पुत्र को जन्म दिया।
 
यद्यपि रानी को कोई पुत्र न था, परंतु पुत्र उत्पन्न करने वाली शक्ति वाली उस खीर को खाने से वह अपने पति के सान्निध्य में रहकर गर्भवती हो गई और समय बीतने पर उसने एक पुत्र को जन्म दिया।
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