इस प्रकार राजा अंग को पुत्र-प्राप्ति कराने के लिए उन्होंने हर प्राणी के हृदय में निवास करने वाले भगवान विष्णु को आहुतियों और पूजा-अर्चना करने का फैसला लिया।
In this way, to enable King Ang to have a son, he decided to offer sacrifices to Lord Vishnu who resides in every heart.
तात्पर्य
यज्ञीय अनुष्ठानों के अनुसार, कभी-कभी यज्ञीय वेदी में पशुओं की बली दी जाती थी। ऐसे पशुओं की बलि उन्हें मारने के लिए नहीं अपितु उन्हें नवजीवन प्रदान करने के लिए दी जाती थी। यह एक प्रयोग था यह देखने हेतु कि क्या वैदिक मंत्रों का उच्चारण सही ढंग से किया जा रहा है। चिकित्सीय प्रभावों का पता लगाने हेतु कभी-कभी किसी चिकित्सीय प्रयोगशाला में छोटे पशुओं को मारा जाता है। अस्पताल में पशुओं को पुनर्जीवित नहीं किया जाता, परन्तु यज्ञीय वेदी में पशुओं की बलि दिए जाने पर वैदिक मंत्रों की शक्ति से इन्हें पुनर्जीवित कर दिया जाता था। इस पद्य में शिपि-विष्टाय शब्द आया है। शिपि का अर्थ है "यज्ञ की ज्वालाएँ"। यज्ञीय अग्नि में यदि हवन कुंड में आहुतियाँ दी जाती हैं, तब वहाँ प्रभु विष्णु ज्वालाओं के रूप में विराजते हैं। इसलिए प्रभु विष्णु को शिपि-विष्ट कहा जाता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)