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श्लोक 4.13.25  |
मैत्रेय उवाच
अङ्गोऽश्वमेधं राजर्षिराजहार महाक्रतुम् ।
नाजग्मुर्देवतास्तस्मिन्नाहूता ब्रह्मवादिभि: ॥ २५ ॥ |
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| अनुवाद |
| श्री मैत्रेय ने उत्तर दिया: हे विदुर, अतीत में राजा अंग ने एक महान यज्ञ सम्पन्न करने की योजना बनाई जिसका नाम अश्वमेध यज्ञ था। वहाँ पर सभी अच्छे एवं जानकार ब्राह्मण मौजूद थे जो जानते थे कि देवताओं को आह्वान कैसे किया जाता है, फिर भी उनके प्रयास के पश्चात् भी किसी देवता ने भाग नहीं लिया और न ही कोई वहाँ प्रकट हुआ। |
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| श्री मैत्रेय ने उत्तर दिया: हे विदुर, अतीत में राजा अंग ने एक महान यज्ञ सम्पन्न करने की योजना बनाई जिसका नाम अश्वमेध यज्ञ था। वहाँ पर सभी अच्छे एवं जानकार ब्राह्मण मौजूद थे जो जानते थे कि देवताओं को आह्वान कैसे किया जाता है, फिर भी उनके प्रयास के पश्चात् भी किसी देवता ने भाग नहीं लिया और न ही कोई वहाँ प्रकट हुआ। |
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