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श्लोक 4.13.18  |
सुनीथाङ्गस्य या पत्नी सुषुवे वेनमुल्बणम् ।
यद्दौ:शील्यात्स राजर्षिर्निर्विण्णो निरगात्पुरात् ॥ १८ ॥ |
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| अनुवाद |
| अंग की पत्नी सुनीथा ने वेन नाम के एक पुत्र को जन्म दिया, जो बहुत ही कुटिल था। साधु स्वभाव के राजा अंग वेन के दुराचरण से निराश होकर घर-गृहस्थी और राजपाट छोड़कर जंगल में चले गए। |
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| अंग की पत्नी सुनीथा ने वेन नाम के एक पुत्र को जन्म दिया, जो बहुत ही कुटिल था। साधु स्वभाव के राजा अंग वेन के दुराचरण से निराश होकर घर-गृहस्थी और राजपाट छोड़कर जंगल में चले गए। |
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